सीएम याेगी की छवि खराब करने की साजिश

दलितों के घर भोजन करके योगी देते हैं सामाजिक समरसता के संदेश

भारतदूत.com

लखनऊ। हाथरस कांड के बहाने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि को नुकसान पहुंचाने की साजिश की गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दलित समाज में अच्छी पैठ है। वह दलितों के घर भोजन करके सामाजिक समरसता का संदेश देते हैं। यही नहीं गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी याेगी कमलनाथ भी दलित समाज से आते हैं।

गोरक्षपीठ से दलितों का पुराना व समरसता भरा नाता है। गाेरक्षपीठाधीश्वर के नाते योगी आदित्यनाथ अक्सर दलितों के घर जाकर भोजन करते हैं। वह कहते हैं कि हिंदू हिंदू है। जाति, धर्म का काेई मतलब नहीं है। जब से मुख्यमंत्री बने हैं, तब से दलितों के उत्‍थान में लगे हैं। अयोध्या जाने के बाद भी योगी ने सामाजिक समरसता का संदेश दिया था। दलित के घर जाकर भोजन किया था। अब विपक्ष इसी छवि को खराब करने की कोशिश में लगा है।

उपचुनाव की वजह से विपक्ष ने दिखाई तेजी

यूपी में विधानसभा का उपचुनाव है। नामांकन प्रक्रिया चल रही है। लिहाजा, विपक्ष ने तेजी दिखाई। विपक्ष का मकसद था कि दलित व सवर्णों के बीच मनमुटाव बढ़ाया जाए ताकि उपचुनाव में फायदा लिया जा सके। इस दांव का कितना फायदा मिलेगा, यह तो वक्त बताएगा। एक बात तय है कि मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तेजी ने विपक्ष की मंशा को धराशायी कर दिया है। मुख्यमंत्री ने पहले एसआईटी गठित की, फिर सीबीआई जांच का आदेश दे दिया।   यूपी के बुलंदशहर, टुंडला, घाटमुपर, बांगरमऊ, नौगांव, मल्हनी और देवरिया सदर सीट पर उपचुनाव होना है।

जातिवाद से गोरक्षपीठ कोसों दूर

राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के चलते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भले ही जातिवादी होने का आरोप लगाया जाए लेकिन यह सच नहीं है। गोरक्षपीठ को सामाजिक समरसता के लिए जाना जाता है। हिंदू, मुस्लिम, सिख व ईसाई के लिए पीठ के दरवाजे हमेशा खुले रहते हैं। गोरक्षपीठाधीश्वर हर किसी के सुख-देख मेंं शामिल होते हैं।

असहिष्‍णुता के आरोप दरकिनार

मुख्यमंत्री याेगी आदित्यनाथ ने असहिष्‍णुता के आरोपों को दरकिनार कर दिया। यूपी के अलग-अलग शहरों में आस्‍था के केंद्राें के पुनर्निर्माण का आदेश दिया।

Related Articles

Back to top button